धोनी और जोस बटलर में से कौन है ज्यादा अच्छा विकेटकीपर और बल्लेबाज
44 सालों के क्रिकेट विश्व कप के बाद पहली बार क्रिकेट के जन्मदाता इंग्लैंड को विश्वकप अपने हाथों में उठाने का मौका मिला। फिर भी इंग्लैंड के विश्व विजेता बनने के साथ कई विवाद भी विश्व कप फाइनल में सामने आए। मगर इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने पूरे विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अगर हम विकेटकीपर की बात करें तो इंग्लैंड के खिलाड़ी जोश बटलर ने पूरे विश्व कप के दौरान काफी प्रभावित किया। उन्होंने फाइनल में अपनी टीम के लिए उपयोगी पारी खेली वही पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का भी विश्वकप अच्छा रहा हालांकि उनको विश्व कप के दौरान काफी आलोचनाओं का सामना जरूर करना पड़ा। मगर फिर भी उन्होंने विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन किया। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि जोस बटलर धोनी में से कौन ज्यादा अच्छा विकेटकीपर और बल्लेबाज है।
महेंद्र सिंह धोनी

विश्व कप में महेंद्र सिंह धोनी का प्रदर्शन काफी मिलाजुला रहा। उन्होंने वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के खिलाफ अर्धशतक लगाया उन्होंने खेले गए 9 मैचों की 8 पारियों में 45 की औसत और 88 के स्ट्राइक रेट से 273 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने 5 छक्के और 20 चौके भी लगाए। इस दौरान 9 मैचों में उन्होंने विकेट के पीछे 10 शिकार किए। जिसमें से 7 कैच और 3 स्टंपिंग थे। धोनी को विश्वकप में धीमी स्ट्राइक रेट के कारण आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। उन्हें स्पिनरों के खिलाफ स्ट्राइक रोटेट करने में काफी समस्याएं देखने को मिली।
जोस बटलर

जोस बटलर विश्व कप से पहले तो शानदार फॉर्म में थे मगर विश्व कप में उन्होंने 11 मैचों में 312 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत 38 का और स्ट्राइक रेट 122 का रहा। उन्होंने विश्व कप के दौरान 22 चौके और 8 छक्के लगाए। विकेट के पीछे उन्होंने 11 मैचों में 14 शिकार किए। जिसमें 12 कैच और 2 स्टंपिंग शामिल थीं। पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने शतक लगाया। वहीं बांग्लादेश और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने अर्धशतक लगाया।
कौन है बेहतर?
दोनों खिलाड़ी 5 और 6 नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए देखे जाते हैं ऐसे में निचले क्रम में स्टाइल रेट का काफी महत्व होता है। ऐसे में बटलर ने शानदार प्रदर्शन किया। वही धोनी पूरे विश्व कप में सबसे ज्यादा बाई रन देने वाले विकेटकीपर बने रहे। विकेटकीपर और बल्लेबाज के तौर पर जोस बटलर काफी बेहतर हैं।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



